15 Alive Evidences of Ramayana | रामायण के 15 जिंदा सबूत

15 Alive Evidences of Ramayana

               भारत की इस धरती पर अलग-अलग कालों में त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु और महेश ने अपने अवतारों से अधर्म और पाप का अंत किया है। जिसके बहुत से प्रमाण इस भारतीय धरती पर आज भी देखने को मिलते है। सतयुग काल में सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु ने मानव अवतार श्री राम का रूप लेकर इस भारत में जन्म लिया था। श्रीराम के जीवन काल के पूरे घटनाक्रम का विवरण वाल्मीकि के द्वारा रचित हिंदू ग्रंथ रामायण में देखने को मिल जायेंगे।

               भगवान श्री राम हिंदुओं के आस्था से जुड़ी कोई कल्पना नहीं है और ना ही हिंदू ग्रंथ रामायण कोई कहानी है। कई लोगों को आज भी रामायण काल के वास्तविकता पर विश्वास नहीं होता है और वो रामायण ग्रंथ में बताई सभी घटनाओं को काल्पनिक मानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि अब ये साइंटिस्ट्स के रिसर्च के आधार पर भी सिद्ध हो चुका है कि रामायण में दिखाई गई सभी घटनाएं सच है और उन्ही में से 15 सुबुतो को आज हम आप के सामने पेश करेंगे। 

1. जानकी मंदिर (Janki Mandir)

               यह नेपाल के जनकपुर शहर में है। जहां पर माता सीता का जन्म हुआ था, इन्हीं के नाम पर यहां जानकी मंदिर का निर्माण किया गया है। जहां पर आज भी लाखों लोगों का आना जाना है।

2. सुग्रीव की गुफा (Sugriv Ki Gufha)

               कर्नाटक के हम्पी शहर में एक किष्किंधा पर्वत थी। जहां दो वानर भाई सुग्रीव और बाली की गुफा और साम्राज्य था। यहीं पर सुग्रीव को श्रीराम ने अपने अधर्मी भाई बाली से मुक्ति दिलाई थी, जिसके कई साक्ष्य आज भी देखने को मिल जाएंगे।

3. पंचवटी जंगल (Panchwati Jungle) 

               मान्यता है कि जब राम, लक्ष्मण और सीता वनवास के लिए निकले थे, तो वह नासिक पंचवटी जंगल में रहते थे। इस जंगल में लक्ष्मण ने रावण की बहन सुपनखा की नाक काट दिए थे। यह पंचवटी वन आज भी नासिक में है।

4. कोनेश्वर मंदिर (Koneshwar Mandir)

               रामायण में उल्लेख है कि रावण ने शिव भक्ति करके भगवान शिव से दस सिरों का वरदान मांगा था। जिसके बाद रावण ने कोनेश्वर मंदिर की स्थापना की थी। जहां आज भी रावण के आकृतियों को देखा जा सकता है। यह दुनिया का पहला ऐसा मंदिर है, जहां रावण की कई आकृतियों को देखा जा सकता है।

5. लेपाक्षी मंदिर (Lepakshi Mandir)

               सीता हरण के बाद रावण माता सीता को जिस मार्ग से लंका ले जा रहे थे, उस मार्ग पर राम भक्त जटायु ने रावण को रोकने के लिए युद्ध किया, लेकिन रावण ने जटायु के दोनो पँख काट के उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। जिसके बाद वो घायल अवस्था में श्रीराम के सामने गिरे और उनकी गोद में ही अपना शरीर त्याग दिया। जिस स्थल पर जटायु गिरे, वहां लेपाक्षी मंदिर का निर्माण किया गया। जो आज भी आंध्र प्रदेश में देखा जा सकता है।

और पढ़ें- कोहिनूर हीरा कहां पर है ?

6. रावण का महल (Ravan Ka Mahal)

               लंका में रावण का महल था, जिसमें वह अपनी रानी मंदोदरी के साथ रहता था। हनुमान जी ने अपने पूछ से रावण की इस विशाल सोने की लंका को जला दिया था। जिसके जले हुए अवशेष आज भी श्रीलंका में देखने को मिलती है।

7. अशोक वाटिका (Ashok Vatika)

               रामायण ग्रन्थ के अनुसार माता सीता के अपहरण के बाद जब माता ने लंका में जाने से मना कर दिया, तब रावण ने लंका की अशोक वाटिका में उन्हें रखा था। अशोक वाटिका में व्यापक मात्रा में अशोक वृक्ष थे, यहीं पर एक वृक्ष के नीचे माता सीता रहती थी। इस जगह को अब सीता एलिया नाम से जाना जाता है, जो वर्तमान में श्रीलंका में स्थित है।

8. हनुमान जी के पद चिन्ह (Hanuman Ji ke Padchinh)

               रावण द्वारा सीता हरण के बाद हनुमान जी माता सीता की खोज में श्रीलंका पहुंचने के लिए समुद्र को पार करने हेतु एक विशाल रूप धारण किये। तब उनके विशाल पद चिन्ह के छाप श्रीलंका के स्थल पर अंकित हो गए। यह अभी रामायण के साक्ष्य को दर्शाता है।

9. द्रोणागिरी पर्वत (Dronagiri Parvat)

               रामायण के कथा में उल्लेख किया गया है कि लक्ष्मण और मेघनाथ के युद्ध में मेघनाथ के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, उनका बचना लगभग असंभव माना जा रहा था। तब राजवैद्य सुरोन के उपाय के अनुसार द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाना था। किन्तु हनुमान जी ने पूरा द्रोणागिरी पर्वत उठा ले आये। जिसमे से संजीवनी बूटी निकाल कर लक्ष्मण के प्राण की रक्षा की गई। माना जाता है कि संजीवनी बूटी में इतनी शक्ति है कि वो मरने वाले व्यक्ति की प्राण को भी बचा सकता है। लक्ष्मण जी के ठीक होने के बाद हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत उसी स्थान पर रख दिया, जो आज भी उत्तराखंड के चमोली गांव में स्थित है।

10. श्रीलंका की काली मिट्टी (Srilanka Ki Kali Mitti)

               रामायण में बताया गया है कि रावण की सोने की लंका, श्रीलंका में विशाल स्तर पर फैला हुआ था। जिसे हनुमान जी ने जलाकर राख कर दिया था, जिसके प्रमाण का अनुमान वर्तमान में श्रीलंका में मिलने वाली काली मिट्टी से लगाया जा सकता है। आज भी बहुत से स्थलों की मिट्टी पूर्णरूप से काली है।

11. कोंडा काटू गाला गुफा (Konda Katu Gaala Gufha)

               हनुमान द्वारा लंका को आग लगाने के बाद रावण द्वारा सीता को अशोक वाटिका से हटा कर कोंडा काटू गाला गुफा में सर रख दिया गया था। जहां कई ऐसे प्रमाण मिले हैं, जो रावण के महल को जाने वाले गुफाओं से मिलते जुलते हैं।

12. राम सेतु (Ram Setu)

               भारत से श्रीलंका की ओर के लिए राम और उनकी सेना ने पत्थरों को समुद्र में फेंक राम सेतु का निर्माण किया था। इन राम सेतु पुल के सहायता से सभी वानर सेना लंका में प्रवेश कर पाए थे। कहा जाता है कि जिन पत्थरों से रामसेतु पुल बनाया गया था, वह पत्थर आज भी समुद्र में तैरते हुए दिखाई देते हैं। जिसमें श्रीराम का नाम लिखा हुआ है। नासा ने भी अपने एक शोध के बाद बताया है कि यह रामसेतु मानव द्वारा निर्मित है।

13. रामलिंगम (Ramlingum / Shivling Sthapna Sthal)

               श्रीराम ने जब रावण की हत्या की,तो उन पर एक ब्राम्हण हत्या का आरोप लगा। जिसे दूर करने के लिए उन्होंने भगवान शिव की आराधना की, जिसके लिए शिवजी ने उनसे चार शिवलिंग की स्थापना करने की मांग की। तब एक शिवलिंग सीता ने बनाया, दो शिवलिंग को हनुमान जी कैलाश से लाए और एक भगवान श्रीराम ने अपने हाथों से बनाया। इस तरह चार शिवलिंग का प्रमाण रामलिंगम आज भी देखा जा सकता है।

14 दीवुरमपोला (Divurampola)

               दीवुरमपोला श्रीलंका में स्थित वह जगह है। जहां एक पेड़ के नीचे माता सीता ने श्रीराम के कहने पर अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्नि परीक्षा दी थी।

15. हनुमान गढ़ी (Hanuman Gadhi)

               माना जाता है कि श्रीराम का इंतजार हनुमान जी इसी जगह पर करते थे। राम निवास अयोध्या में एक प्राचीन हनुमान मंदिर है, जिसे हनुमानगढ़ी के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को यह जगह रहने को दी था,जिसके कारण इसे हनुमान जी का घर भी कहा जाता है। मान्यता है कि श्रीराम के दर्शन के पूर्व अयोध्या में श्री हनुमान जी के दर्शन हनुमानगढ़ी में करने से मनोकामना जल्दी पूरी होती है। रामायण में भी हनुमानगढ़ी का उल्लेख किया गया है।

admin

admin