चंगेज़ ख़ान भारत पर कब्ज़ा क्यों नहीं कर पाया?

Changez Khan Kyu Bharat Par Kabza Kyu Nahi Kar Paya

              चंगेज़ खान के विषय में कहा जाता है कि वह अत्यंत क्रूर शासक था, जो पहले शहरों और गांव में रह रहे लोगों को लूटता था। उसके बाद निर्ममता से उनकी हत्या कर देता था। चंगेज़ खान के शासन में जगह-जगह पर इंसानी कंकालों और खोपड़ियों के ढेर पाए जाते थे।

              स्वागत है आपका आज आपके मन में भी ये सवाल उठता है की जिस कारण आज भी जब चंगेज़ खान का जिक्र होता है, तो सब लोग उसकी क्रूरता के भय से डर जाते हैं। चंगेज खान जोकि अत्यंत निर्दयी शासक था, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि चंगेज खान ने भारत पर आक्रमण नहीं किया?

चंगेज़ खान का असली नाम

              तेमुजिन (Temujin) था, जिसका मतलब होता है लौहकर्मी। लेकिन आगे चलकर पूरी दुनिया में अपना वर्चस्व स्थापित करने के बाद उसका नाम बदलकर चंगेज़ खान(Changez Khan) रख दिया गया, जिसका मतलब होता है, सागर का महान शासक। चंगेज़ खान का जन्म सन् 1162 में मंगोलिया(Mongolia) स्थित ओनोन(Onon) नदी के समीप एक काबिले में हुआ था। उसके पिता येसूजेई जोकि(Yesu Jaye Joki)  कियात(Kiyaat) काबिले के मुखिया थे उन्होंने तेमुजिन की माता होलय(Holyan) जोकि अन्य कबीले से संबंध रखती थी, उनका अपहरण करके उनसे शादी की थी।

              जिस कारण तेमुजिन के पिता से अन्य काबिले वाले दुश्मनी मानने लगे थे। यही कारण था कि चंगेज़ खान जब छोटा था, तभी उसकी पिता की हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद उसकी माता ने 3 सगे, 2 सौतेले और 1 सगी बहन समेत चंगेज़ खान की परवरिश की। जिसके चलते कहा जा सकता है कि चंगेज़ खान का शुरुआती जीवन काफी चुनौतीपूर्ण रहा।

              शुरुआत से ही चंगेज़ खान मंगोलिया सभ्यता से जुड़ा रहा, चंगेज़ खान ने युद्ध कौशल और नीति अपने पिता से सीखी थी, जोकि एक काबिले के मुखिया थे। यही कारण था कि चंगेज खान आगे चलकर मंगोल शासक के तौर पर जाना गया। बता दें इस समय मंगोल देश (East और Central Asia) के बीच बसा एक देश है। चंगेज़ खान तेंग्रीस(Tengris) धर्म से जुड़ा था। बता दें कि तेंग्री मंगोलो के मुख्य देवता के तौर पर जाने जाते थे।

              चंगेज़ खान जब केवल 12 वर्ष का था, तब उसकी शादी बोरते(Borte) नामक एक लड़की से करा दी गई थी। जिसको एक दूसरे काबिले के लोग चंगेज से दुश्मनी के चलते अपहरण करके ले गए थे, ऐसे में चंगेज़ खान ने अपनी पत्नी को अपहरणकर्ताओं से बचाने के लिए भी काफी खूनी संघर्ष किया।

              इसके बाद तो मानो जैसे युद्ध करना और लोगों को काटकर फेंक देना, चंगेज़ खान का शौक बन गया। उसने यूरोप से लेकर एशिया तक अपने शक्तिशाली वर्चस्व को स्थापित किया और दुनिया को अपने खौफनाक मसूबों से रूबरू कराया।

              चंगेज़ खान के इतिहास के बारे में बात करते समय हम उसके चचा जान तुगरिल(Tugril) उर्फ ओंग खान(Ong Khan) भी जरूर करना बनता है। जिसके बाद और एक व्यक्ति तातार कैराइट(Tatar Karite) का नाम चंगेज़ खान के पिता की मौत में सामने आया था। जिसके बाद चंगेज़ खान ने अपने चाचा जान और अपने पिता के हत्यारे के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। इस दौरान उसने अपने सगे भाई जमूका(Jamuka), पिता के हत्यारे तातार कैराइट और चाचा को मौत के घाट उतार दिया।

              जिसके बाद मंगोल कबीलियों ने एक सभा बुलाकर उसे चंगेज़ खान यानि शासक की गद्दी दे दी गई। जिसके बाद चंगेज़ खान से सबसे पहले चीन(China) पर अपना राज स्थापित किया। उसके बाद चंगेज़ खान ने अमू दरिया(Amu Darya), तुरान(Turan), ख्वारजम(Khwarazm), ओट्रार(Otrar), बुखारा(Bukhara) दुनिया के 3 करोड़ 30 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल तक अपने शक्तिशाली वर्चस्व को स्थापित किया। चंगेज़ खान के विषय में जानने के बाद यह सवाल आपके भी दिमाग में जरूर आया होगा कि इतने क्रूर शासक के आतंक से भारत कैसे बच गया?

              तो आपको बता दें कि जब चंगेज़ खान ने गजनी जो अब  अफगानिस्तान (Afghanistan) है और पेशावर जो असल में अब पाकिस्तान(Pakistan) है वहा  पर अपना राज्य स्थापित कर लिया था। तब ख्वारिज्म(Khwarizm) वंश के शासक अलाउद्दीन मुहम्मद(Alauddin Mohammad) की मृत्यु के बाद उसका उत्तराधिकारी जलालुद्दीन मंगवर्नी(Jalaluddin Mangwarni) भागकर सिंधु(Sindhu) नदी की ओर आ गया। जिसका पीछा करते हुए चंगेज़ खान भी सिंधु नदी पार करके भारत में प्रवेश कर गया।

              जहां उसने दिल्ली के तत्कालीन सुल्तान इल्तुतमिश(Sultan Iltutmish) से मदद मांगी, लेकिन इल्तुतमिश ने चंगेज़ खान से भयभीत होकर उसे मदद देने से इंकार कर दिया। हालांकि इस दौरान उसने ख्वारिज्म वंश के उत्तराधिकारी से युद्ध जारी रखा और अंत में उसे हराने में सफल भी हो गया। लेकिन सिंधु नदी के आसपास डेरा डाले चंगेज़ खान को प्राकृतिक कठिनाइयों, अशुभ संकेतों और असहनीय गर्मी के चलते सिंधु नदी से ही वापिस लौटना पड़ा।

              जिसके चलते 12वीं सदी का भारत चंगेज़ खान के भयंकर आक्रमण का शिकार होने से बच गया। चंगेज़ खान ने अपने पूरे जीवनकाल में करीब 4 करोड़ से अधिक लोगों को मौत के घाट उतारा था, जोकि अब तक किसी भी क्रूर शासक द्वारा की गई सबसे अधिक हत्याएं हैं। आपको बता दे की चंगेज़ खान अपने जीवनकाल में बौद्ध, जैन, इस्लाम और ईसाई अनेक धर्मों के धर्मगुरुओं से मिला था। लेकिन वह सबसे अधिक बौद्ध धर्म से प्रभावित था।

              इतिहासकारों की मानें तो चंगेज़ खान ने इतनी शादियां की थी, कि सम्पूर्ण दुनिया में उस दौर में हर जगह उसके वंशज पाए गए होंगे। यानि पूरी दुनिया में चंगेज़ खान के डीएनए से हर 200 में से एक व्यक्ति का डीएनए मिल जाता होगा। हालंकि इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं, कि उसके अनेकों विवाह रहे होगें लेकिन कोई इस बात से भी इंकार नहीं कर सकता है कि उसके अनेक स्त्रियों से संबंध नहीं रहे होंगे या उसने महिलाओं का बलात्कार नहीं किया होगा।

              चंगेज़ खान को मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह का कहर मानते थे। चंगेज़ खान के जीवन पर जैक वेदरफोर्ड नामक लेखक ने एक पुस्तक लिखी है, जिसमें उन्होंने बताया है कि चंगेज़ खान के पास बहुत सारी संपत्ति और धन था, लेकिन उसकी मृत्यु के बाद उसे बड़े ही साधारण तरीके से दफनाया गया था।

              ऐसा माना जाता है की 60 की उमर के करीब चंगेज खान की एक युद्ध के दौरान ही मौत हो गई थी पर सबसे खास बात की चंगेज खान जैसे बड़े शासक का मकबरा कहाँ है यह भी आजतक नहीं पता चल सका है। हालाँकि उस बड़े शासक की याद में एक मकबरेनुमा इमारत अवश्य बनाई गई है पर वास्तविक मकबरा आज भी अज्ञात है। इसका कारण यह माना जाता है कि चंगेज खान कि इच्छा नहीं थी कि कोई उसके मकबरा को जाने इसलिए कहा जाता है कि उसके साथियों ने उसके मरने के बाद उसके मकबरे वाले क्षेत्र में दफनाने के बाद हजार घोड़ों को दौड़ाकर जमीन को बराबर कर दिया था।

              साथ ही मंगोलिया में यह माना जाता है कि अगर उसकी कब्र मिलेगी तो यह उनके लिए सही शकुन नहीं होगा। पर कोशिशें आज भी जारी हैं। आखरी में हम सब के दिमाग में ये सवाल भी जरूर हैं की  इतने बड़े शासक के निशान या उसके मकबरे की आखिर किसने क्यों कोई तलाश नही की और क्यों उसकी कोई तस्वीर नही है? तो सबसे खास बात यह कि आज किसी भी इतिहासकार के पास यह प्रमाण नहीं है कि चंगेज खान दिखने में कैसा था। न तो कोई तस्वीर है और न ही कोई पेंटिंग। इतिहासकारों को कुछ सिक्के अवश्य प्राप्त हुए हैं जिनमें उसकी तस्वीर होती पर वह भी अस्पष्ट ही रहे।

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