घट रही है हिन्दुओं की आबादी | Why Population of Hindus Decreasing

facts about Hindus

घट रही है हिन्दुओं की आबादी, क्यों है करोड़ों हिन्दू शांत, आखिर क्यों पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में हिन्दुओं की संख्या जस की तस है ? कहाँ गए यहाँ के हिन्दू ? आखिर भारत में हिन्दुओं के क्या हालात है ? चलिए चर्चा करते है इन सभी सवालों पर।

हिन्दू धर्म जिसे दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म कहा जाता है, इस धर्म को मानने वाले आज पूरी दुनिया में पाए जाते है, वहीँ दुनिया में कुछ ही ऐसे देश है जहाँ बहुसंख्यक आबादी में हिन्दू मौजूद है जैसे भारत और नेपाल लेकिन अगर गौर किया जाए तो आज दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जो हिन्दू राष्ट्र देश हो, नेपाल किसी जमाने में हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था लेकिन उसे भी secularism के झांसे में डालकर धर्मनिरपेक्ष देश बना दिया गया और हमारा भारत तो वैसे भी धर्मनिरपेक्ष देश है, जबकि दूसरी तरफ दुनिया में करीब 27 ऐसे देश है जहाँ इस्लाम धर्म को आधिकारिक धर्म के रूप में दर्जा दिया जाता है, जहाँ की लगभग पूरी जनसँख्या इस्लाम धर्म को ही मानती है। 

खैर आज भले ही पूरी दुनिया में हिन्दू धर्म की चर्चा हो रही है,और हिन्दू धर्म के फैलाव की चर्चा सामने आ रही है लेकिन इसके साथ ये भी सच जुड़ा है कि हिन्दुओं की संख्या में काफी गिरावट देखने को मिल रही है, ऐसा कैसे हो सकता है, आप यही सोच रहे होंगे न तो सटीक Example पाकिस्तान और बांग्लादेश है जहाँ हिन्दुओं की आबादी में जबरदस्त गिरावट देखी जा रही है, 2017 की जनगणना के अनुसार पाकिस्तान में  करीब 2 percent हिन्दू आबादी थी और वहीँ बांग्लादेश की बात करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ हिन्दू आबादी 9.5 percent थी।

ये आकड़े वाक़ई हैरान करने वाले है क्योकि इन देशों में हिन्दुओं की आबादी किसी समय पर 15 परसेंट से 22 percent तक हुआ करती थी, वैल ये तो कुछ नहीं है भारत देश जिसको हिन्दुतान के नाम से भी जाना जाता है, यहाँ भी हिन्दुओं की जनसँख्या में भारी गिरावट देखी गई हैँ, जी हाँ ये कोई मजाक नहीं है, जहाँ एक तरफ हिन्दुओं की आबादी कम होती जा रही है वहीँ दूसरी तरफ देश में मुसलमानों की आबादी बढ़ती जा रही है, चलिए आपको detail में बताते है देश में मुसलमान और हिन्दुओं की बढ़ती और घटती हुई आबादी के बारे में।

साल 1951 में जब हमारा देश पूरी तरह से आजाद हुआ था तब स्वतंत्र भारत की पहली बार जनगणना की गई थी, तब उस दौरान देश की पूरी जनसँख्या 36.1 करोड़ थी और इस आबादी में साल 1981 तक लगभग 32.2 करोड़ का इजाफ़ा हुआ, 1981 में जनसंख्या का ये आकड़ा 68.3 करोड़ तक पहुंच गया था, जिसके बाद 2011 में हुई जनगणना के according देश की जनसँख्या लगभग 120 करोड़ से ज्यादा की थी और बात करें आज के समय की तो ये आकड़ा करीब 140 करोड़ से ज्यादा पहुंच गया है। 

अब यहाँ जरा गौर फरमाइयेगा, आजादी के समय यानी साल 1951 में भारत में मुसलमानों की आबादी लगभग 9.8 percent थी, वहीँ साल 2011 की Census के according मुसलामानों की आबादी का ये आकड़ा 14.23 percent पहुंच गया। इस हिसाब से पिछले 60 सालों में मुसलमानों की आबादी में लगभग 5 percent का इजाफा हुआ और अगर आज के समय में इस आकड़े को देखा जाए, या दोबारा से Census किया जाए तो ये आकड़ा काफी ज्यादा बढ़ चुका होगा, वहीँ दूसरी तरफ देश में हिन्दू आबादी को देखा जाए तो वो लगातार कम होती हुई नजर आ रही है, जी हाँ आपको बता दें साल 1951 में भारत में हिन्दुओं की आबादी लगभग 84 percent थी, जो 2011 की रिपोर्ट के अनुसार घटकर 79.8 percent रह गई और ऐसे ही आज Census करने पर ये संख्या और भी कम देखने को मिली हैँ।          

इस हिसाब से आप समझ ही सकते है कि जिस तरह से बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशो में मुसलमानों की गिनती बढ़ती जा रही है वहीं हिन्दुओं की आबादी घटती जा रही है उसी तरह भारत में भी ऐसा ही सिलसिला जारी है, जहाँ लगातार मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है लेकिन हिन्दुओं की घट रही है।    

बता दें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक और हिन्दुओं की आबादी में गिरावाट का मुद्दा काफी जोरों शोरों से उठा था, times of India की publish की गई, एक रिपोर्ट के अनुसार हिन्दुओं की घटी हुई संख्या पर नजर डालें तो हिन्दुओं की आबादी में जो कमी आई थी वो बटवारें के समय सबसे ज्यादा थी, 1941 से 1951 के बीच पाकिस्तान में हिन्दुओं में जबरदस्त गिरावट देखी गई थी, आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 1931 के दौरान पाकिस्तान में हिन्दुओं की संख्या 15 percent थी जो 1941 तक 14 percent पहुंच गई थी लेकिन यही संख्या 1951 में 1.3 तक पहुंच गई थी।

हालांकि इसके बाद गिरावट का सिलसिला थम गया, और पाकिस्तान में 1998 में हुई जनगणना के according हिन्दुओं की संख्यां 30 लाख थी,  2017 में जब पाकिस्तान में जनगणना हुई थी तब उसके अनुसार पाकिस्तान की कुल जनसंख्या 207 मिलियन यानी करीब 20 करोड़ 70 लाख थी जिसमे हिन्दुओं की आबादी जस की तस बनी रही जो करीब 30 लाख ही थी, पर अगर देश की बढ़ती हुई जनसँख्या के हिसाब से देखा जाए तो हिन्दुओं की आबादी में इजाफ़ा होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  

वहीँ बांगलादेश का भी कुछ यही हाल है, यहाँ की हिन्दू आबादी पर नजर डाली जाए तो बटवारे से लेकर अब तक यहाँ हिन्दुओं की आबादी तेजी से घटती चली जा रही है, ख़बरों के अनुसार वहां की जनसँख्या में हिन्दुओं की हिस्सेदारी लगभग 10 percent से भी कम रह गई है और ये गिरावट पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा है, बांगला देश में 1951 में हिन्दुओं की आबादी 22 परसेंट थी जो 2011 की रिपोर्ट के अनुसार करीब 9.5 परसेंट ही रह गई।     

इन आकड़ों के हिसाब से आप समझ सकते है कि किस तरह हिन्दू धर्म के मानने वालों  की संख्या में गिरावट बढ़ती ही जा रही है और ये सुनकर तो बड़ी हैरानी हो रही है कि हिन्दुओं में गिरावट का सिलसिला भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है। वैसे बांग्लादेश और पाकिस्तान के इन आकड़ों के अनुसार आज इन देशों से लाखों हिन्दू गायब है पर आखिर वो कहाँ गए ये सवाल उठना लाजमी है क्योकि ये संख्या कोई छोटी मोटी तो नहीं है बल्कि ये तो लाखों में है और इतने सारे हिन्दुओं की कमी का मतलब तो यही हो सकता है कि शायद वहां के हिन्दू देश छोड़ कर चले गए, या उन्हें मार दिया गया और या फिर उनका धर्म परिवर्तन कर दिया गया और यही बांग्लादेश में भी हो सकता है।

यानी इस हिसाब से हम समझ सकते है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिन्दुओं पर कितना अत्याचार किया जा रहा है लेकिन सच तो ये है कि किसी भी हिन्दू को इनसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता, जी हाँ ये बिलकुल सच है अगर पड़ता तो आप ही सोचिये इतने बरसों में आज तक दुनिया के किसी भी देश ने पाकिस्तान या बांग्लादेश से ये सवाल किया कि आखिर ये हिन्दुओं पर इतना अत्याचार क्यों कर रहे है।

और बाकी देशों के बारे में क्या ही कहा जाये , हम अपने भारत देश की ही बात कर लेते है कि क्या भारत ने कभी इस मुद्दे पर सवाल उठाया और भारत सरकार के अलावा आप भारत मे रह रहे करोड़ों हिन्दुओं को ही ले लीजिये क्या उन्होंने कभी ये सवाल उठाया है कि बंगला देश और पाकिस्तान में रहने वाले हमारे लाखों हिन्दू भाई कहाँ है? ये सवाल आज तक किसी के द्वारा उठाया ही नहीं गया और उठाया भी क्यों जाए किसी को कोई परवाह ही नहीं है।       

बाहर के देशों के बारे में क्या बात करें हमारे देश के हिन्दुओं के ही हाल बुरे चल रहे है, सूत्रों के अनुसार 2011 से 2021 के बीच यानी पूरे 10 सालों में हिन्दुओं की आबादी लगातार कम हुई है जबकि मुसलामानों की आबादी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, अब आप ही सोचिये  जब ये हाल है हमारे देश का तो बाहर के देशो के बारे में क्या ही सोचा जा सकता है ।

एक तरफ हिन्दू बहुल देश जिन्हे धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में जाना जाता है वहीँ दूसरी तरह मुस्लिम बहुल देश secular होने से इस्लामिक republic या फिर इस्लाम को अपना राष्ट्र धर्म मानने वाले देश बनते चले गए, आज दुनिया में कई देश इस्लामिक रिपब्लिक है , साल 1956 में पाकिस्तान इस्लामिक रिपब्लिक देश बन गया , साल 1979 में ईरान, साल 1980 में बांग्लादेश और 2005 में ईराक इस तरह दुनिया के तमाम देश या तो पूरी तरह से इस्लामिक कंट्री बन गए या फिर इस्लाम को इन्होने अपना राष्ट्र धर्म मान लिया, इन ज्यादातर इस्लामिक देशों में धर्म का पालन करना कोई choice , या option नहीं है बल्कि ये मज़बूरी है क्योकि लगभग सभी इस्लामिक देशों में धर्म के अपमान को अपराध माना जाता है।      

एक तरफ ये इस्लामिक देश हैँ जो अपने धर्म को लेकर कितनी सख्ती करते है वहीँ नेपाल और भारत जो धर्मनिरपेक्ष के चंगुल में आज भी फसे है, किसी समय पर हिन्दु राष्ट्र होने वाला नेपाल, जिसे साल 2008 में संविधान में बदलाव करते हुए धर्मनिरपेक्ष का दर्जा दे दिया गया, उसी तरह 1977 में प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने भी भारत के साथ secular शब्द जोड़ दिया था।     

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